बेटी से बहू
आज 31 दिसंबर साल का आखिरी दिन । और मेरा भी अरे ! गलत मत समझिए नए साल में मेरे जीवन में भी नया बदलाव आने वाला है। जी हां मैं भी शादी के बंधन में बंध रही हूं । ऐसा लगता है जैसे कल की ही तो बात है, एक लड़की जिसका सारा जीवन उसके माता - पिता के आस पास घूमता था । आज वो एक अनजान लड़के की पत्नी और एक अनजान घर की बहू बनने वाली है । कई बार मुझे लगता हैं कि मैं एडजेस्ट नहीं कर पाऊंगी । क्योंकि कोई भी मुझे समझ नहीं सकता । और उस घर में दो बहुएं,नाती, पोता,भांजा,बड़ी दीदी सब है । मैं अपनी जगह वहां कभी बना पाऊंगी भी या नहीं? नए परिवार में नई में सब कुछ करना कितना मुश्किल है,सबने अपना स्थान सबके दिलों - दिमाग़ पे बना रखा है। फिर में उन लोगों को जानती ही कितना हूं। बस सगाई और उसके बाद से 15 दिन की बाते इससे अधिक तो जा कर ही पता चलेगा । यहां तो सब दिन भर बबीता - बबीता करते है,पर वहां नहीं होगा । उफ़ मैंने तो आज तक किसी को मनाया भी नहीं,न मुझे मनाना आता है ।
एक तो सब अनजान ऊपर से कौन कैसा है किसे पता। खासकर मेरा होने वाला जीवन साथी ,मैं एक कमरे में कैसे रहूंगी ! आज तक मैंने मां के अलावा अपना बिस्तर किसी के साथ बांटा नहीं है । हां जानती हूं ये चीज मेरी गलत है,सबके साथ सब बांटना चाहिए । और मैं पूरी कोशिश भी करूंगी पर क्या उस घर के लोग मुझे अपना पाएंगे? मेरी कमियों खामियों को अपना पाएंगे ? क्या कोई मुझे प्यार करेगा ? ये सारे प्रश्नों का उत्तर न ही मालूम होता है । पर इसका विपरीत भी हो सकता है । क्या होगा पता नहीं पर डर तो खत्म होने का नाम ही लेता। बोलना ही कठिन है मेरे लिए , अपनी मन की बात तो जाने दो नॉर्मल बात करना भी मेरे लिए कठिन है।
Babita💕


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