भोर की कहानी
कितना अच्छा लगता है अकेले भोर की किरणों को निहारना,चिड़ियों की चचहाट,वो मंद - मंद पवन का बहना,हर ओर बस शांति और इस शांति के बीच "मैं" । हां खुद को भूलना इतना आसान कहा है ? जानते है ? जब अंदर का शोर चीख रहा हो या चीख चुका हो,तब आपको एकांत प्रिय होता है,जहां केवल आप है और कोई नहीं। कई बार मैं ये सोचती हूं ? शायद मुझे अपनी बात रखनी नहीं आती,या शायद मुझ में ही कुछ कमी है,जो भी हो पर मैं खुदको बहुत पसंद करती हूं.......हा हा हा हा........ अब जो भी समझिए ,आप मेरे बारे में क्या समझेंगे पता नहीं । पर आप मेरी लेखनी के बारे में जरूर कहिएगा। हां - तो मैं कहा थी; एकांत में शोर शराबे से दूर खुद के साथ, जानते है ! बचपन से ऐसे ही हूं "मैं" भीड़ में भी अकेली मुझे कभी वो साथ मिला ही नहीं ,और इसका कारण मेरी समझा न पाने की क्षमता है। कहने को तो ये ज्वाइंट फैमिली है पर मैं एक बात बखूबी समझ गई हूं । फैमिली ज्वाइंट हो या न्यूक्लियर आपको सबके आगे पीछे घूमना होगा,क्योंकि आपको लोग चोट पहुंचा सकते है क्योंकि वो उनका अधिकार है। पर आपको फिर भी उनकी जी हजूरी करनी है,जानते है मतभेद धीरे - धीरे म...


