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समझ ?

 समझ केवल स्त्री के हिस्से आई ।  पुरुष के हिस्से काम,घर के लोग, जिम्मेदारी सब है। हम स्त्रियां बस समझ नहीं पाती,हम राई का पहाड़ बना लेती । क्योंकि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन है, यहां पर दुश्मन से तात्पर्य मुझसे यानि में अपनी बात कर रही हूं । क्योंकि की जो चीज मुझे सबसे ज्यादा न पसंद थी वहीं हो रही है,तुलना ! कोई क्या जनता है कि मैने क्या - क्या खोया है। जिसे बया कर पाने में मैं असमर्थ हूं ।  पिता का घर हर बेटी के लिए कितना सुख दाई होता है न। किसी को कुछ कहना नहीं,किसी के प्रति कोई बैर भावना नहीं । पर क्या पिता के घर में आप या मैं अपने भाई बहन से लड़े नहीं है । पर हम फिर मान जाते है क्यों पर क्या कोई ऐसे भाई - बहन भी होंगे जिन्होंने लगभग 4 सालों से खुलकर बात नहीं की हो। जिनका पूरा बचपन आधी जवानी हंसी - खुशी से बीता हो । जहां सम्मान का अर्थ पैर छूना,नमस्ते करना ,जरूरी नहीं है। बस सम्मान आंखों में होता । पर क्या इस चीज को किसी को समझा सकते है,जिसके साथ बचपन बिताया है उसने कभी पैर छूने को महत्व नहीं दिया। सुबह के बेड टी से लेकर शाम को घर लेट हो जाएगा मैसेज,मां को बता देना । स...

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