छोटी सी बात
मुझे फ़र्क पड़ता है हर छोटी चीज़ से,क्योंकि मैने कभी नहीं देखा इन सारी बातों को होते हुए । अपना कहते है सब, अपना लगता कहा ? अरे छोटी सी बात है........पर वो बात मुझसे क्यों नहीं है ? बात आपसे है मुझसे नहीं ! ये समझाना कितना कठिन है जो मैं महसूस कर रही हूं । वो आपको समझा पाना कठिन है, शोख पूरे होने में और शोख एडजस्ट करने में अंतर है । सब तुम्हारा मेरा नहीं ,मैने कभी लाइट या पानी के लिए नहीं सुना हां बचत करनी चाहिए।पर बचत का अर्थ ये है कि मेरे कमरे की एक लाइट को भी गिना जाएगा कि मैं जलाती हूं पूरी रात । वो भी किसके लिए अपने बच्चे के लिए,बुरा लगता है जब मुझसे कुछ और,और आपसे कुछ और कहा जाता है। पता नहीं पर आपको कैसे नहीं दिखता ? पर मुझे दिखता खाने - पीने उठने बैठने में अंतर को देख । मैं रही हूं एक परिवार एक घर में जहां लड़ाई भी हुई है । पर कोई चाय पीने के लिए नहीं टोकता,जहां चाय, कॉफी,जूस किसी से पूछना नहीं पड़ता कि पीयू की नहीं । जहां एक को हर चीज की छूट दूसरे को किसी चीज की नहीं । अंतर तो है ,आप मानो चाहे नहीं, रह जरूर रही हूं पर खुल के कहा। पसन्द तो एक की ही पूरी होती है,वो न ...


