इरिटेट

बेवजह ही मैं लोगो से उम्मीद लगा लेती हूं। ठीक ही है कम से कम ये तो पता चला कि उम्मीद लगाना बेफिजूल । जैसे में यहां हूं वैसे ही वहां रहना होगा," चुप " क्योंकि किसी बात को रिपीट करना गलत है। पर एक लड़की की शादी होने वाली होती है,तो ऐसा होता है एक ही ख्याल उसके मन में गूंज रहा होता है। हां में आराम से न कर सकती थी, इतने लड़कों के रिश्ते को मना कर दिया । तो ये भी कर सकती थी ! पर नहीं किया क्योंकि इन लोगों ने मुझे पैसे से नहीं तोला, पर आज बस इतनी छोटी सी बात को लेकर बहस हुई। तो ये समझ आ गया कि मेरी फीलिंग्स की कोई वैल्यू है। टीचर बच्चों से कहते तुम रिपीट कर के पढ़ो या बच्चों जो न समझ आए 100 बार पूछो ! पर दो तीन बार रिपीट होने पर सब इरिटेट हो जाते है।
 हां मुझे कई चीजों से डर लगता हैं,तो इसका मतलब में गलत हूं।
इतने दिन से मुझे एक बात समझ आ गई कि उनके लिए दोस्त क्रिकेट घर important है। पर मैं ! " मैं " कहा हूं,कही नहीं । राधा मां सच तो ये है कि तुमसे अधिक तो छोड़ो तुम्हारे पैर के नाख़ून के बराबर भी मुझसे कोई प्रेम नहीं कर सकता । जब कोई मुझे समझ नहीं सकते तो प्रेम क्या खाक ही करेंगे। बड़ी - बड़ी बाते करना आसान है पर अमल करना मुश्किल । मुझे भी बुरा लगता है,क्या हर बार मुंह से बोलना जरूरी है। प्रेम क्या जिस्म के मिलने के बाद ही होता ? शादी का अर्थ ये तो नहीं कि किसी की फीलिंग्स की धज्जियां उड़ा दी जाए क्योंकि आपको पसंद नहीं है। मुझे भी कई चीजें नहीं पसंद पर इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं बोल दूं रोज क्रिकेट और दोस्तों की बाते सुनती हूं एक ही बात पचहत्तर बार सुनी । पर मैने तो बहस नहीं की ,पर मेरी एक बात पे इतना लेक्चर और अपनी बातों पे गोर तक नहीं किया जाता । और इसे आजादी कहा जा रहा है। सच तो ये है कि मैं एक कैद से दूसरे कैद में जा रही हूं जो जैसा कहेंगे सब सुनना होगा, करना भी होगा । पर अब मुझे बात ही नहीं करनी न कुछ सुनना है न समझना है 








Babita 💕

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