पिता

 


कितना कुछ लिखा मां पे,पिता को कैसे भूल गई!

एक नन्ही सी गुड़िया आज कितनी बड़ी हो गई।

जो पिता की आहट सुन दौड़ी चली जाती थी,

गोदी में चढ़ नन्हे हाथों से जेबें टटोला करती थी।

पता था जेबों में उसकी पसंद की चॉकलेट होंगी।

नन्ही सी गुड़ियां की नींद पिता के कंधे पे पूरी होगी।

जायज़ मांगो को हरदम पूरा किया,चादर छोटी थी !

पर खुशियां अपार दिया।

मेरी गलतियों को प्यार से पुचकार दिया,

पहली रसोई जब बनाई मैंने,

मेरी कड़क रोटी को तारीफों के पुल से बांध दिया।

 आज भी हर बात जिनसे कह देती हूं।

अपने हृदय पट पिता के सामने खोल देती हूं।

सही गलत का भेद जिसने बताया मुझे, वो पिता है मेरे,

जिसने खुले आकाश मैं उड़ना सिखाया मुझे ।




Babita 💕 


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