हल्दी
मैंने ये चौथी बार पिता जी को इतना रोते हुए देखा था। पहली दफा वो तब रोए, जब पिता के एक लोते पुत्र ने माता - पिता से पहले,अपने सास - ससुर को गोरखनाथ दर्शन करवाना जरूरी समझा । इसमें कोई गलत बात नहीं है,पर क्या चार पहियों की गाड़ी में पिता के लिए एक सीट मिलना मुश्किल था? उस समय मां जीवित थी,और अपनी बीमारी से भी जूझ रही थी,ये बात उनके दिल पे लग गई थी । ये बात मुझे और दी को पता है,आज तक भाई से कहने की हिम्मत नहीं हुई। उसने पैसे कमाना जरूर सिख लिया पर शायद दिल कमाना भूल गया।
दूसरी बार पिता जी तब रोए जब माता जी बैकुंठ चली गई। वो दिन भी अजीब था 30 oct 2023 जब मैं और पापा ही मां के साथ थे । मां से अंतिम बार मिलना,हाथ पकड़ना सब मेरे भाग्य में था। कई बार क्रोध में उसने भाई से कहा था,ते हमरा के छू न पायबी अंतिम बार ।शायद वो घटित भी हुआ था,जिस दिन गुजरात से भईया भाभी को लेकर आ रहे थे,उसी दिन मां उनसे बिना मिले चली गई। और पिता जी मेरे मां के जाने के बाद तब रोए जब मेरी बड़ी बहन और पोता आया । जिसे पकड़ के वो बहुत रोए ,पापा मां से बहुत प्यार करते थे! थे कहना गलत होगा करते है।
तीसरी बार अपने बचपन के कष्टों को याद करते हुए पिता जी खूब रोए। उस समय वो मेरा विवाह तय कर आए थे । वो मुझे मां की तरह समझा रहे थे,की एक औरत घर को सवार सकती है और बिगाड़ भी सकती है। वो चाहते है कि मैं मां की तरह बनू हर कष्ट सह के भी खुश रहूं। पैर उतना ही पसारूं जितनी चादर हो। पति का मान बढ़ाऊं। और फिर अपने बचपन के दुःख को बताते - बताते उनकी आँखें छलक गई। और बात सत्य भी थी,न खाने के लिए सही भोजन,न ही कपड़े थे पर एक चीज मेरे पिता और उनके भाइयों में थी । लगन ,आगे बढ़ने की, कितना भी कष्ट भरा जीवन रहा हो। सरकारी स्कूल में पढ़े तीनों भाई काबिल बने दो पुलिस में,और मेरे पिता असम राइफल्स में भर्ती हुए। पर उन्होंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी मां से विवाह और तीन बच्चों के होते हुए b.a अंग्रेजी विषय से पूरा किया। और हम तीनों को भी पढ़ाया,हर शौक पूरा किया। दो बेटियों को कभी बोझ नहीं समझा,हमेशा शान समझा।
चौथी दभा पापा मेरी हल्दी के दिन रोए,उनकी आँखें मानो आज सारा प्रेम लुटा रहे थे। इतना वो, दी कि बिदाई या हल्दी में भी नहीं रोए थे। पहले मुझे हमेशा ये लगता था कि पापा अपने बेटे और मां बड़ी दी से बहुत प्रेम करते हैं। मुझसे कोई करता ही नहीं,पर सत्य ये है कि मां और पापा सबसे अधिक मुझसे प्यार करते है। भले आज की तरह स्टेटस न लगाया हो,पर मेरी हर छोटी चीज का ध्यान रखा । मां जब तक जीवित थी मैं मां पिता के साथ ही सोती थी। मां मेरे बिना सोती भी नहीं थी। इसलिए मुझे लगता है मुझे मां को छोड़ कर b.ed करने नहीं जाना चाहिए था। मैं ये नहीं कहती कि ऐसा करने से वो बीमार नहीं होती । पर शायद वो इतनी जल्दी बीमार नहीं होती। उनकी बीमारी बढ़ने का कारण भाभी भी है,क्योंकि वो हिंदी सीरियल देख के आई है। जहां सास नन्द खराब होती है। और स्वयं के मां पिता भाभी ही केवल सही है। और सही है क्योंकि मेरी शादी में किचेन मानो कूडादान बन गया है। और दीदी अगर जा कर साफ सफाई कर दे बिना कुछ कहे,तब भी भाभी की मां पानी लेने के बहाने देख आती ही की कैसे भाई बहन भोजाई के बीच में आग लगाया जाए।ताकि कमाऊ बेटी उनके साथ रहे सबका खर्चा उठाए। भाभियां कभी गलत नहीं होती क्या हुआ एक डायलिसिस पेशेंट से दो मीठे बोल नहीं पाती थी,क्या हुआ कि उनके हाथ में सूजन था वो अपने बाल कंघी नहीं कर पाती थी। भाभी मेरी इतनी सुंदर है,मां को छू के हाथ थोड़ी गंदा कर सकती है।वैसे भी वो कहा 60 से 70 कमाने वाली सरकारी कर्मचारी।और मैं m.a,b.ed की हुई लड़की जिसके लिए बाहर की चका चौंध से जरूरी घर लगा,पैसे कमाने से जरूरी मां बाप लगे। मॉल जाने से जरूरी मां के साथ हंसना लगा।शायद इसलिए में पिछड़ी रह गई,क्योंकि मैं महीने में दो बार पार्लर नहीं जा पाई। भाभी की मां की तरह उन्हें मुंह में खाना नहीं खिला पाई,उनकी मां ने एक बेटी की हरियाणा शादी करवा के,सास से न्यारा करवा के गुजरात बुला लिया दामाद के साथ। अब ये दूसरा दामाद भी क्यों रहे बाप के साथ और डाइवोर्स देना मेरी भाभी के बाएं हाथ का खेल है। कमाऊ बीवी बच्चे को ले कर कभी भी जा सकती है मायके और बिचारा पति करे भी तो क्या मां बाप से जरूरी पत्नी और उनके ससुराल वाले होते है। क्योंकि स्टैंडर्ड और रईसी में हमसे शायद अच्छे है। और जितने लोग अच्छे होते है उनके साथ हमेशा अच्छा ही होता है,भाभी और भाभी के घर वाले दुनिया के सबसे अच्छे लोगों में आते है। लिखने के लिए बहुत कुछ है पर मोबाइल से लिखना तकलीफ देह है।
Babita 💞


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