हैप्पी विमेन्स डे


तुम स्त्री हो हर हाल में चलना होगा ,

तुम स्त्री हो गिर कर खुद ही संभालना होगा,

तुम गौतम कैसे बनोगी ?

 निकली जो घर से, तो हज़ार निगाहों को सहना होगा,

जिम्मेदारी का बोझ तुम पे है सदा,

ठोकर भी तुमको ही खाना होगा,

अहिल्या सी पवित्र भले तुम,राम को पैर लगना होगा,

भरी सभा में होगा चिर हरण, गांधारी सा मौन रहना होगा,

स्त्री ही स्त्री को खींचे हर बार मेरे माधव को लाज बचाना होगा,

बस एक दिन कैसे स्त्री पर ? 

जिसने सारा जीवन  अर्पण किया सब पर,

मां ,बहन,मित्र,प्रेमिका,पत्नी,पुत्री हर रूप में प्रेम दिया सबको ,

तो केवल एक दिन कैसे हुआ उसका ?









Babita 

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