परिवर्तन
" मैं " हां " मैं " अब बदल रही हूं! अच्छा बदलाव है या बुरा मैं नहीं जानती । पर इतना समझ आ रहा है कि अब धीरे - धीरे मुझमें कुछ बदलाव हो रहे । मुझे एकांत जितना पसंद है,अब मुझे लोगो की भीड़ भी अच्छी लग रही है। अचानक से न जाने क्यों पर किसी का होना जरूरी सा हो गया है। आज मिलकर ऐसा लगा मानो में कितने दिन से नहीं मिले जैसे काफी बरस हो गए हो । हां ये फिल्मी लाइन सी लगती है,पर न जाने क्यों आज मन किया उसके कांधे पे मेरा सिर हो .........किसी एकांत जगह बस घंटों गुजर दूं..............बस मैं और वो हो और खुला नीला आसमान। पर ये सारी बातें बिन कहे उनसे पूरी करवाना चाहती हूँ। उफ़ न जाने आज क्यों इतनी बचकानी हरकत कर रही हूं। कितनी दफा बेफिजूल में कॉल किया ये जानते हुए कि वो ऑफिस में है। और फालतू की कई बाते कर बैठती हूं ,और वह भी सुनते है । क्या उनका सुनना ठीक है ! शायद अभी हम नए जो है, पर जैसे उनको देखकर मैं खिल जाती हूं । शायद ही मैं आज तक किसी के लिए खिलती हूंगी , पर एक बात है हम दोनों ही अनरोमांटिक है । हमें कुछ समझ ही नहीं आता क्या बात करे कैसे करे। आज भी ऐसा ही लग रहा था,और उनके पास बात करने के लिए मोबाइल,वेब सीरीज, रिल्स,वीडियो,फिल्म, क्रिकेट की बाते कर लेंगे पर उसके अलावा कुछ नहीं। कई बार लगता है हिंदी फिल्मों में हीरो कैसे लड़की का हाथ पकड़ते है, चूड़ियां पहनाते है,या फिर जुल्फ संवारते है, वैसे ही मेरे रियल लाइफ हीरो क्यों नहीं करते,इतनी शर्म लज्जा क्यों? पर लज्जा भी जरूरी है,शायद ये सबसे जरूरी है अपनी सभ्यता संस्कार जरूरी है। कितना भी बंधन मजबूत क्यों न हो पर उसे लाज के पर्दे में रखना जरूरी है। हर रिश्ते को लोगो के नजरों से बचा के भी रखने की आवश्यकता है।🧿🧿🧿🧿🧿🧿
Babita🧿😘


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