फ़र्क
फ़र्क तो है,
मुझमें तुम में,
बस ये फर्क ईश्वरीय है,
पर जो फर्क आपस में करते है
वो चुभती हर दम है
सब अपने है,
पर लगते कहा है?
जब मां ही बच्चों में फर्क करे,
तो अपना किसे कहे,
इसलिए तो अपना कहा है कोई
झूठे रिश्ते ढोह रहे है सब
बस निकलना है मुझे
इस बेमानी रिश्तों से दूर
सब फर्क करे लड़का - लड़की में,
अपने पराए में,
छोटे बड़े में,
धनवान और निर्धन में,
और फिर ऐसे ही फर्क करते - करते
सब को एक ही रास्ते से जाना है,
सब रह जाएगा यही,
तब कैसे करोगे फ़र्क ?
Babita 💕

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